AI बिल स्कैनर: रसीद और GST इनवॉइस की फोटो से डेटा निकालें
AI बिल स्कैनर रसीद, कैश मेमो या GST टैक्स इनवॉइस की फोटो को व्यवस्थित फ़ील्ड में बदलता है: विक्रेता का नाम और उसका टैक्स नंबर (जैसे GSTIN), बिल नंबर, तारीख, मुद्रा, कुल रकम, टैक्स से पहले की रकम, टैक्स की दर और रकम, मात्रा, यूनिट रेट और आइटम। जो फ़ील्ड पढ़ा नहीं जाता उसे वह खाली छोड़कर उसका नाम बताता है; टोटल दोबारा नहीं जोड़ता और मुद्रा नहीं बदलता। बिल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा या नहीं, यह टूल नहीं बल्कि CGST नियम 46 और CGST अधिनियम की धारा 16 तय करते हैं — और डीज़ल के बिल पर GST क्रेडिट मिलता ही नहीं, क्योंकि डीज़ल GST के दायरे से बाहर है। Logistivo में ड्राइवर ऐप से बिल स्कैन करता है और वह उस दिन ड्राइवर को सौंपे गए ट्रक से जुड़ जाता है।
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दिल्ली से मुंबई और वापस एक ट्रिप। ड्राइवर लौटकर काग़ज़ों का गट्ठर थमाता है: पेट्रोल पंप की डीज़ल पर्चियाँ, ढाबे के बिल, पंक्चर वाले की हाथ से लिखी कच्ची पर्ची, टायर की दुकान का GST बिल, धर्मकांटे की पर्ची — और FASTag से कटे टोल का कोई काग़ज़ नहीं। अकाउंट्स को इनसे दो अलग चीज़ें बनानी हैं: ट्रिप का हिसाब (इस ट्रक की इस ट्रिप पर असल में कितना ख़र्च हुआ, ड्राइवर को कितना लौटाना है) और टैक्स का हिसाब (किस बिल पर इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलेगा, कौन-सा ख़र्च आयकर में घटेगा, और क्या कितने साल रखना है)।
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बिल स्कैनर पहला काम सेकंडों में कर देता है। दूसरा काम वह नहीं करता, लेकिन उसके लिए ज़रूरी फ़ील्ड ठीक-ठीक निकाल देता है। यह पेज दूसरे काम के बारे में है — भारत के GST और आयकर नियमों के हिसाब से।
यह टूल फोटो से क्या-क्या पढ़ता है?
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आप एक दस्तावेज़ अपलोड करते हैं — JPEG, PNG, WebP, HEIC या PDF, ज़्यादा से ज़्यादा 8 MB। जवाब में मिलता है: दस्तावेज़ का प्रकार (रसीद, इनवॉइस, टोल टिकट, ईंधन रसीद), विक्रेता का नाम, उसका देश-कोड अगर छपा हो, विक्रेता का टैक्स नंबर (GSTIN या जो भी छपा हो), बिल नंबर, तारीख, मुद्रा, कुल रकम, टैक्स से पहले की रकम, टैक्स की रकम और दर, ख़र्च की श्रेणी, मात्रा और इकाई (लीटर, किलो, नग, किलोमीटर, घंटा), यूनिट रेट, भुगतान का संकेत (नकद, कार्ड, फ़्यूल कार्ड, इनवॉइस, अज्ञात), आइटम की सूची, भरोसे का स्कोर, न पढ़े जा सके फ़ील्ड की साफ़ सूची, टिप्पणियाँ और हिंदी में छोटा सार।
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तीन नियम जानबूझकर रखे गए हैं। अंदाज़ा नहीं — जो फ़ील्ड पढ़ा नहीं गया वह खाली लौटता है और उसका नाम सूची में आता है। दोबारा जोड़-घटाव नहीं — छपा हुआ टोटल और आइटम का जोड़ अलग हों तो दोनों लौटते हैं, साथ में टिप्पणी; हिसाब चुपचाप 'ठीक' नहीं किया जाता। मुद्रा नहीं बदली जाती — रकम उसी मुद्रा में लौटती है जो बिल पर छपी है। तारीख साल-महीना-दिन के रूप में आती है; अगर सिर्फ़ दिन और महीना छपे हों तो तारीख खाली रहती है, साल मान नहीं लिया जाता।
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फ़ाइल डिस्क पर नहीं लिखी जाती: प्रोसेस होती है, नतीजा लौटता है, फ़ाइल हटा दी जाती है। नतीजा पूरा दिखाया जाता है, काटा नहीं जाता। हर विज़िटर को सीमित संख्या में मुफ़्त रन मिलते हैं, जो Logistivo के सभी मुफ़्त AI टूल में साझा हैं; अस्वीकार या विफल अनुरोध गिना नहीं जाता। उसके बाद मुफ़्त अकाउंट काफ़ी है।
कौन-सी फोटो ठीक से पढ़ी जाती है?
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कौन-सी फोटो ठीक से पढ़ी जाती है? — पढ़ने की ज़्यादातर ग़लतियाँ फोटो खींचते समय ही तय हो जाती हैं:
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एक फोटो में एक ही बिल — पूरा, किनारे से किनारे तक, ताकि ऊपर विक्रेता और नीचे टोटल दोनों दिखें।
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थर्मल पर्ची पर सीधी रोशनी या फ़्लैश की चमक न हो; चमक वाली जगह के अंक अक्सर खाली लौटते हैं।
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मुड़ी हुई पर्ची को सीधा करके रखें; मोड़ पर छपा टोटल सबसे ज़्यादा ग़लत पढ़ा जाता है।
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e-इनवॉइस ईमेल से आया हो तो फोटो के बजाय सीधे वही PDF अपलोड करें।
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फ़ाइल 8 MB से छोटी हो और JPEG, PNG, WebP, HEIC या PDF में हो।
GST टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना ज़रूरी है?
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GST टैक्स इनवॉइस में क्या-क्या होना ज़रूरी है? — CGST नियम, 2017 का नियम 46 टैक्स इनवॉइस के ब्योरे गिनाता है। बाईं ओर नियम की माँग है, दाईं ओर यह कि टूल उसमें से क्या पढ़ता है — ताकि पता रहे कि आँख से क्या जाँचना है।
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(a) सप्लायर का नाम, पता और GSTIN — टूल पढ़ता है?: नाम और टैक्स नंबर — हाँ; पता — नहीं
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(b) लगातार सीरियल नंबर, अधिकतम 16 अक्षर, वित्त वर्ष में अनोखा — टूल पढ़ता है?: बिल नंबर — हाँ
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(c) जारी करने की तारीख — टूल पढ़ता है?: हाँ
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(d) रजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता का नाम, पता और GSTIN — टूल पढ़ता है?: नहीं — यह आप ख़ुद देखें
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(e)–(f) अनरजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता: ₹50,000 या ज़्यादा की सप्लाई पर नाम, पता और डिलीवरी का पता — टूल पढ़ता है?: नहीं
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(g) HSN कोड — टूल पढ़ता है?: अलग फ़ील्ड में नहीं
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(h)–(i) माल या सेवा का विवरण, मात्रा और इकाई — टूल पढ़ता है?: हाँ: आइटम, मात्रा और इकाई
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(j)–(k) कुल मूल्य, और छूट के बाद कर-योग्य मूल्य — टूल पढ़ता है?: हाँ: कुल रकम और टैक्स से पहले की रकम
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(l)–(m) टैक्स की दर और रकम (केंद्रीय, राज्य, एकीकृत, केंद्रशासित प्रदेश कर या सेस) — टूल पढ़ता है?: हाँ, जैसा छपा है
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(n)–(o) अंतर-राज्यीय सप्लाई में सप्लाई का स्थान, और अलग हो तो डिलीवरी का पता — टूल पढ़ता है?: नहीं
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(p) टैक्स रिवर्स चार्ज पर देय है या नहीं — टूल पढ़ता है?: नहीं
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(q) सप्लायर या अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर — टूल पढ़ता है?: नहीं
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(r) IRN वाला QR कोड, अगर इनवॉइस नियम 48(4) के तहत बना हो — टूल पढ़ता है?: नहीं — IRN अलग फ़ील्ड में नहीं आता
पक्का बिल बनाम कच्ची पर्ची: ITC किस पर मिलता है?
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रोज़मर्रा की भाषा में 'पक्का बिल' वह है जो नियम 46 के ब्योरों वाला टैक्स इनवॉइस हो, और 'कच्ची पर्ची' वह जिसमें विक्रेता का GSTIN, सीरियल नंबर या टैक्स की रकम न हो। इनपुट टैक्स क्रेडिट की शर्तें CGST अधिनियम की धारा 16(2) में हैं: आपके पास सप्लायर का जारी किया टैक्स इनवॉइस हो, माल या सेवा आपको मिली हो, सप्लायर ने वह टैक्स सरकार को जमा किया हो, और आपने अपना रिटर्न भरा हो। साथ ही सप्लायर को उस इनवॉइस का ब्योरा अपने रिटर्न में देना होता है, ताकि वह आपको पोर्टल पर दिखे।
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इसलिए जब ट्रांसपोर्ट कंपनी GST में रजिस्टर्ड है, तो टायर, स्पेयर पार्ट या रिपेयर का बिल आपकी कंपनी के GSTIN के साथ बनवाना चाहिए — नियम 46(d) रजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता का नाम, पता और GSTIN माँगता है। बिना GSTIN की पर्ची पर ख़र्च तो दिखता है, पर क्रेडिट का आधार नहीं बनता। ड्राइवर को एक ही निर्देश याद रखना है: बड़ा बिल हो तो दुकान से निकलने से पहले कंपनी का GSTIN बिल पर लिखवाओ। यह कमी बाद में फोटो से ठीक नहीं होती; इसके लिए सप्लायर को ही इनवॉइस दोबारा बनाना पड़ता है।
टैक्स इनवॉइस, बिल ऑफ़ सप्लाई, कैश मेमो: किस काग़ज़ पर क्रेडिट मिलता है?
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टैक्स इनवॉइस, बिल ऑफ़ सप्लाई, कैश मेमो: किस काग़ज़ पर क्रेडिट मिलता है? — ड्राइवर के लाए हर बिल पर 'GST' लिखा हो सकता है, पर क्रेडिट का रास्ता दस्तावेज़ के प्रकार से तय होता है:
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टैक्स इनवॉइस (नियम 46) — कौन जारी करता है: रजिस्टर्ड सप्लायर, कर-योग्य सप्लाई पर | ITC: धारा 16 की शर्तें पूरी हों तो हाँ
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IRN और QR कोड वाला e-इनवॉइस (नियम 48(4)) — कौन जारी करता है: अधिसूचित सप्लायर — आज ₹5 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवर वाले | ITC: हाँ; ऐसे सप्लायर का IRN के बिना जारी 'इनवॉइस' इनवॉइस नहीं माना जाता (नियम 48(5))
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बिल ऑफ़ सप्लाई (नियम 49) — कौन जारी करता है: छूट-प्राप्त सप्लाई देने वाला या कंपोज़िशन योजना वाला सप्लायर | ITC: नहीं — इसमें टैक्स की रकम होती ही नहीं
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हाथ का कैश मेमो, कच्ची पर्ची — कौन जारी करता है: अक्सर अनरजिस्टर्ड दुकानदार | ITC: नहीं; यह सिर्फ़ ख़र्च का सबूत है
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पेट्रोल पंप की डीज़ल पर्ची — कौन जारी करता है: पेट्रोल पंप | ITC: नहीं — डीज़ल GST के दायरे से बाहर है
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FASTag स्टेटमेंट — कौन जारी करता है: FASTag जारी करने वाला | ITC: टोल ख़र्च का सबूत; टैक्स इनवॉइस नहीं
कंपोज़िशन वाले ढाबे या दुकान का बिल कैसे पहचानें?
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छोटे ढाबे, पंक्चर की दुकानें और पार्ट्स विक्रेता अक्सर GST की कंपोज़िशन योजना में होते हैं। CGST नियम 5(1)(f) के अनुसार ऐसा व्यक्ति अपने बिल ऑफ़ सप्लाई के ऊपर 'composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies' लिखता है, और नियम 5(1)(g) के अनुसार कारोबार की जगह के बोर्ड पर 'composition taxable person' लिखना होता है।
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ड्राइवर के लिए आसान पहचान यही है: बिल के ऊपर यह वाक्य दिखे, तो उस पर टैक्स की रकम नहीं होगी और ITC का सवाल ही नहीं उठता। टूल वाक्य को अलग फ़ील्ड में नहीं लौटाता, लेकिन टैक्स की रकम का खाली रहना और दस्तावेज़ का प्रकार आपको यही इशारा देंगे।
डीज़ल की पर्ची पर GST क्रेडिट क्यों नहीं मिलता?
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क्योंकि हाई स्पीड डीज़ल पर GST लगता ही नहीं। संविधान (एक सौ एकवाँ संशोधन) अधिनियम, 2016 ने अनुच्छेद 279A(5) में लिखा कि GST परिषद वह तारीख सुझाएगी जिससे पेट्रोलियम क्रूड, हाई स्पीड डीज़ल, मोटर स्पिरिट (पेट्रोल), प्राकृतिक गैस और एविएशन टर्बाइन फ़्यूल पर GST लगेगा। उसी संशोधन ने इन वस्तुओं की बिक्री पर राज्यों का कर (राज्य सूची की प्रविष्टि 54) और इन पर केंद्र का उत्पाद शुल्क (संघ सूची की प्रविष्टि 84) बनाए रखा। जब तक वह तारीख लागू नहीं होती, पंप पर डीज़ल का बिल राज्य का VAT या बिक्री कर और केंद्र का उत्पाद शुल्क लिए होता है — GST नहीं।
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नतीजा सीधा है: ट्रक कंपनी का सबसे बड़ा ख़र्च, डीज़ल, ITC में नहीं आता; यह पूरी तरह लागत है। फिर भी डीज़ल की पर्ची सबसे क़ीमती काग़ज़ है — लीटर और रेट से ही प्रति किलोमीटर खपत निकलती है और भाड़े में डीज़ल-अंतर का हिसाब बनता है। इसके लिए देखें डीज़ल प्राइस एस्केलेशन क्लॉज़ कैलकुलेटर।
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डीज़ल प्राइस एस्केलेशन क्लॉज़ कैलकुलेटर
e-इनवॉइस और IRN: किस बिल की फोटो काफ़ी नहीं होती?
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नियम 48(4) के तहत सरकार जिन रजिस्टर्ड व्यक्तियों को अधिसूचित करती है, उन्हें इनवॉइस का ब्योरा कॉमन पोर्टल पर अपलोड करके इनवॉइस रेफ़रेंस नंबर (IRN) लेना होता है। नियम 48(5) साफ़ कहता है कि ऐसा व्यक्ति किसी और तरीक़े से इनवॉइस जारी करे तो उसे इनवॉइस माना ही नहीं जाएगा। अधिसूचना संख्या 10/2023-केंद्रीय कर (10 मई 2023) से 1 अगस्त 2023 से यह व्यवस्था उन करदाताओं पर लागू है जिनका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा है; ऐसे इनवॉइस पर IRN वाला QR कोड होता है (नियम 46(r))।
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ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए मतलब: किसी बड़े टायर डीलर या सर्विस सेंटर का B2B बिल, जिस पर IRN और QR कोड होना चाहिए था और नहीं है, ITC के लिए जोखिम है — उसकी फोटो चाहे कितनी भी साफ़ हो। बिल स्कैनर IRN को अलग फ़ील्ड में नहीं लौटाता और उसकी जाँच नहीं करता। फोटो से ख़र्च दर्ज होता है; e-इनवॉइस की वैधता GST की अपनी व्यवस्था में जाँचनी पड़ती है।
माल के काग़ज़ और ख़र्च के काग़ज़ में क्या फ़र्क़ है?
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ट्रक में दो अलग तरह के काग़ज़ चलते हैं। पहले माल के: सप्लायर का इनवॉइस, LR या बिल्टी, और e-way बिल — CGST नियम 138 के तहत ₹50,000 से ज़्यादा मूल्य की खेप चलने से पहले कॉमन पोर्टल पर e-way बिल बनना होता है। ये काग़ज़ बताते हैं कि ट्रक में क्या है, किसका है और कहाँ जा रहा है।
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दूसरे ख़र्च के: डीज़ल पर्ची, टोल, ढाबा, पंक्चर, धर्मकांटा। ये बताते हैं कि ट्रिप में पैसा कहाँ गया। यह टूल दूसरी तरह के काग़ज़ों के लिए बना है। माल के इनवॉइस की फोटो भी वह पढ़ लेगा, पर ड्राइवर के ख़र्च के हिसाब में उसका कोई काम नहीं।
ट्रिप का कौन-सा ख़र्च किस काग़ज़ से साबित होता है?
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डीज़ल, AdBlue — काग़ज़: पेट्रोल पंप की पर्ची; फ़्यूल कार्ड हो तो कार्ड कंपनी का स्टेटमेंट | ध्यान दें: डीज़ल पर GST नहीं, इसलिए ITC नहीं; लीटर और रेट से खपत निकलती है
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टोल — काग़ज़: FASTag खाते का स्टेटमेंट या टोल प्लाज़ा की रसीद | ध्यान दें: इलेक्ट्रॉनिक कटौती की अक्सर पर्ची नहीं मिलती — स्टेटमेंट ही सबूत है
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ढाबा, खाना — काग़ज़: ढाबे का बिल या कच्ची पर्ची | ध्यान दें: ITC आम तौर पर नहीं — धारा 17(5) खाने-पीने पर क्रेडिट रोकती है
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रात का ठहराव — काग़ज़: होटल या लॉज का बिल | ध्यान दें: कंपनी के GSTIN वाला बिल ही ITC का आधार बन सकता है
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टायर, पंक्चर, रिपेयर — काग़ज़: दुकान या वर्कशॉप का बिल | ध्यान दें: माल ढोने वाले ट्रक की रिपेयर पर क्रेडिट धारा 17(5) से नहीं रुकता; GSTIN वाला बिल लें
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धर्मकांटा — काग़ज़: तौल की पर्ची | ध्यान दें: लोड के वज़न का ऑपरेशनल सबूत भी है
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लोडिंग-अनलोडिंग (हमाली) — काग़ज़: पर्ची या रसीद | ध्यान दें: अक्सर नकद; नीचे दी गई नकद भुगतान की सीमा ध्यान में रखें
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ई-चालान, जुर्माना — काग़ज़: चालान की रसीद | ध्यान दें: क़ानून के उल्लंघन का जुर्माना आयकर में व्यवसायिक ख़र्च नहीं माना जाता
धारा 17(5): कौन-सा क्रेडिट हमेशा रुका रहता है?
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CGST अधिनियम की धारा 17(5) कुछ ख़रीद पर ITC रोकती है, भले ही वह व्यवसाय में इस्तेमाल हो। ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए दो बातें मायने रखती हैं। पहली: व्यक्तियों को ढोने वाली मोटर गाड़ियाँ जिनमें ड्राइवर समेत 13 तक सीटें हों — जैसे मैनेजर की कार — उन पर, और उनकी सर्विसिंग, रिपेयर और बीमा पर, कुछ अपवादों को छोड़कर क्रेडिट नहीं मिलता। माल ढोने वाले ट्रक इस रोक में नहीं आते। दूसरी: खाना-पीना और आउटडोर कैटरिंग पर क्रेडिट आम तौर पर नहीं मिलता, सिवाय उन मामलों के जहाँ वही सेवा आगे उसी श्रेणी की कर-योग्य सप्लाई में इस्तेमाल हो।
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इसका मतलब है कि ढाबे के बिल को स्कैन करके ITC के ढेर में डालना ग़लत होगा — वह ट्रिप की लागत है, क्रेडिट नहीं। टूल ख़र्च की श्रेणी बताता है, पर क्रेडिट का फ़ैसला नहीं करता।
बिल पर छपा GST ख़ुद कैसे जाँचें?
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अगर रकम टैक्स समेत है, तो 18% की दर पर टैक्स = कुल रकम × 18 ÷ 118। टैक्स समेत ₹11,800 के बिल में ₹1,800 टैक्स और ₹10,000 कर-योग्य मूल्य है; राज्य के भीतर की सप्लाई में यह ₹900 CGST और ₹900 SGST के रूप में छपेगा, राज्य से बाहर ₹1,800 IGST के रूप में। 5% की दर पर सूत्र कुल × 5 ÷ 105 है।
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टूल यह हिसाब नहीं लगाता — वह जो छपा है वही लौटाता है। पर नतीजे के तीन आँकड़े — कुल रकम, टैक्स से पहले की रकम और टैक्स — मिलाकर देखने से सेकंडों में पता चल जाता है कि कोई अंक ग़लत पढ़ा गया या बिल ही ग़लत छपा है। एक-दो पैसे का अंतर अक्सर राउंड-ऑफ़ होता है; रुपयों का अंतर बिल को आँख से देखने का संकेत है।
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WhatsApp या ईमेल पर आया बिल अगर PDF है, तो उसकी फोटो लेने के बजाय वही PDF अपलोड करें; स्क्रीनशॉट भी चलता है, बशर्ते उसमें पूरा एक ही बिल हो।
दूसरे राज्य के होटल का बिल: ITC क्यों अटक जाता है?
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लंबी ट्रिप में ड्राइवर उस राज्य में रुकता है जहाँ कंपनी रजिस्टर्ड नहीं है। ठहरने की सेवा में सप्लाई का स्थान वह जगह होती है जहाँ होटल या लॉज है (IGST अधिनियम की धारा 12(3))। इसलिए होटल उसी राज्य का CGST और SGST लगाता है, IGST नहीं। दिल्ली में रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्टर, महाराष्ट्र के होटल के बिल पर लगे महाराष्ट्र के CGST और SGST का क्रेडिट अपने दिल्ली के GSTIN पर नहीं ले सकता।
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व्यावहारिक नतीजा: दूसरे राज्य के ठहराव के बिल को ITC की उम्मीद में अलग रखने के बजाय सीधे ट्रिप की लागत में डालें, जब तक आपका CA कुछ और न कहे। टूल बिल पर छपे टैक्स की दर और रकम पढ़ता है; वह यह नहीं बताता कि टैक्स किस राज्य का है और आपके GSTIN पर क्रेडिट बनता है या नहीं।
रास्ते में नकद भुगतान: ₹10,000 और ₹35,000 की सीमा क्या है?
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भारत के आयकर क़ानून का एक नियम ट्रक मालिकों को सीधे छूता है: किसी एक व्यक्ति को एक दिन में ₹10,000 से ज़्यादा का भुगतान बैंकिंग या मान्य ऑनलाइन तरीक़े के बजाय नकद हुआ, तो वह ख़र्च कटौती में नहीं माना जाता। माल वाहनों को चलाने, भाड़े पर लेने या लीज़ पर लेने के भुगतान के लिए यह सीमा ₹35,000 है। यह नियम 1961 के अधिनियम की धारा 40A(3) में था और 1 अप्रैल 2026 से लागू आयकर अधिनियम, 2025 में भी जारी है — नई धारा संख्या और अपवाद अपने CA से मिला लें।
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ड्राइवर रास्ते में वर्कशॉप को ₹15,000 नकद दे दे, तो रसीद बिल्कुल साफ़ होने पर भी कटौती ख़तरे में है। टूल हर बिल पर भुगतान का संकेत लौटाता है — नकद, कार्ड, फ़्यूल कार्ड — ताकि ऐसे बिल महीने के अंत से पहले अलग दिख जाएँ। किसी भुगतान पर अपवाद लागू होता है या नहीं, यह फ़ैसला आपके CA का है।
फ़्यूल कार्ड से भरा डीज़ल ड्राइवर को क्यों नहीं लौटाया जाता?
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जब ड्राइवर फ़्यूल कार्ड से डीज़ल भरवाता है, पंप की पर्ची सिर्फ़ यह दर्ज करती है कि लेन-देन हुआ — कौन-सा पंप, कितने लीटर, कभी-कभी कार्ड के आख़िरी अंक। पैसा ड्राइवर की जेब से नहीं गया; भुगतान कंपनी और कार्ड जारी करने वाली कंपनी के बीच होता है। ऐसी पर्ची पर ड्राइवर को पैसा लौटाना या उसके हिसाब में जोड़ना, उसी डीज़ल के लिए दोबारा भुगतान है।
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उल्टी दिक़्क़त साधारण बैंक कार्ड की है: पर्ची से पता नहीं चलता कि कार्ड कंपनी का था या ड्राइवर का निजी। इसलिए टूल भुगतान का सिर्फ़ संकेत देता है, फ़ैसला नहीं करता। अंदाज़ा लगाने से बेहतर है ड्राइवर से पूछ लेना: कम पैसा पाने वाला ड्राइवर शिकायत करेगा और ग़लती सुधर जाएगी, ज़्यादा पाने वाला आम तौर पर चुप रहेगा।
बिल कितने साल रखें, और क्या फोटो काफ़ी है?
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CGST अधिनियम की धारा 36 के तहत हिसाब-किताब और रिकॉर्ड उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख से 72 महीने तक रखने होते हैं। नियम 57 इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की शर्तें बताता है: ठीक इलेक्ट्रॉनिक बैकअप हो, ताकि दुर्घटना या प्राकृतिक कारण से रिकॉर्ड नष्ट होने पर जानकारी उचित समय में वापस मिल सके; और माँगे जाने पर रिकॉर्ड प्रमाणित करके हार्ड कॉपी या किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप से पढ़े जा सकने वाले फ़ॉर्मेट में दिया जा सके।
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बिल स्कैनर के मामले में यहाँ एक जाल है: निकाले गए फ़ील्ड बिल की कॉपी नहीं हैं। स्प्रेडशीट की एक पंक्ति — विक्रेता, रकम, टैक्स — पूरे दस्तावेज़ की जगह नहीं ले सकती। काग़ज़ हटाना हो तो फोटो भी रखें, सिर्फ़ फ़ील्ड नहीं। थर्मल पेपर की पर्ची कुछ महीनों में फीकी पड़ जाती है, इसलिए उसी दिन फोटो लेना बिल को बचाने का भी तरीक़ा है।
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और एक अलग बात: निर्यात-आयात में माल के साथ चलने वाला कमर्शियल इनवॉइस इस पेज के टैक्स इनवॉइस से अलग दस्तावेज़ है; उसके लिए देखें कमर्शियल इनवॉइस फ़ॉर्मेट।
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कमर्शियल इनवॉइस फ़ॉर्मेट
ट्रिप ख़त्म होने पर ड्राइवर का हिसाब कैसे बंद करें?
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ट्रिप ख़त्म होने पर ड्राइवर का हिसाब कैसे बंद करें? — हर ट्रांसपोर्टर का तरीक़ा अलग है, पर ये जाँचें लगभग हर जगह झगड़े बचाती हैं:
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ट्रिप पर दिया गया एडवांस और ड्राइवर के लाए बिलों का जोड़ एक ही मुद्रा में आमने-सामने रखें।
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हर बिल पर भुगतान का तरीक़ा तय करें: नकद और ड्राइवर का निजी कार्ड लौटाने लायक़; फ़्यूल कार्ड और कंपनी का कार्ड नहीं।
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FASTag स्टेटमेंट से टोल मिलाएँ — इलेक्ट्रॉनिक कटौती की अक्सर पर्ची नहीं होती।
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₹10,000 से ऊपर के नकद भुगतान अलग निकालें; वे आयकर कटौती के लिए जोखिम हैं।
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GSTIN वाले बिल ITC के लिए अकाउंट्स को अलग भेजें; बाक़ी को सिर्फ़ लागत मानें।
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जो बिल पढ़े नहीं गए, उनके खाली फ़ील्ड ड्राइवर से उसी दिन पूछकर भरें, अंदाज़े से नहीं।
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हर बिल की फोटो और काग़ज़ दोनों रखें; निकाले गए फ़ील्ड रिकॉर्ड की जगह नहीं लेते।
भारतीय बिलों में मशीन रीडिंग कहाँ चूकती है?
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भारतीय बिलों में मशीन रीडिंग कहाँ चूकती है? — पढ़ने की ग़लतियाँ बेतरतीब नहीं होतीं; वे जानी-पहचानी जगहों पर इकट्ठी होती हैं, और हर जगह जाँची जा सकती है:
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लाख-करोड़ वाले कॉमा — भारतीय बिल पर 1,23,456.00 का मतलब 123456.00 है — कॉमा लाख और हज़ार पर लगते हैं। टूल रकम बिना कॉमा और दशमलव बिंदु के साथ लौटाता है; अगर रकम दस गुना छोटी या बड़ी दिखे तो यहीं जाँचें।
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CGST और SGST की दो पंक्तियाँ — राज्य के भीतर की सप्लाई में टैक्स दो हिस्सों में छपता है, जैसे 9% + 9%; राज्य से बाहर एक ही IGST। देख लें कि टैक्स की दर और रकम दोनों हिस्सों को मिलाकर लौटी है या सिर्फ़ एक हिस्से की।
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हाथ से लिखी पर्ची — पंक्चर वाले या हमाली की कच्ची पर्ची पर अक्सर न GSTIN होता है न साल। जो पढ़ा नहीं गया वह खाली लौटेगा — उसे अंदाज़े से न भरें।
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तारीख का क्रम — भारतीय बिल पर 03/04/2026 का मतलब 3 अप्रैल है, 4 मार्च नहीं। जब दिन और महीना दोनों 12 या उससे कम हों, तो ट्रिप की तारीख से मिला लें।
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टोटल बनाम आइटम — आइटम का जोड़ छपे टोटल से न मिले तो टूल दोनों लौटाता है और टिप्पणी देता है; अक्सर यह राउंड-ऑफ़ या छूट होती है, जिसे आँख से देखना चाहिए।
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₹, Rs. और INR — बिल पर रुपये का चिह्न, 'Rs.' या 'INR' — तीनों एक ही मुद्रा हैं; टूल मुद्रा ISO कोड में लौटाता है। अगर बिल पर मुद्रा कहीं छपी ही न हो, तो फ़ील्ड खाली रह सकता है — उसे अपने आप भरा हुआ न मानें।
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MRP बनाम चुकाई गई रकम — पैक्ड सामान के बिल पर MRP और असल बिक्री मूल्य दोनों छपे हो सकते हैं। आइटम की रकम वही मानें जो बिल के टोटल में जुड़ी है, MRP नहीं; जहाँ दोनों अलग दिखें वहाँ एक बार आँख से मिला लें।
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हिंदी और क्षेत्रीय भाषाएँ — बिल हिंदी, मराठी, गुजराती या किसी और भाषा में हो सकता है; टूल उसे वैसे ही पढ़ता है जैसा छपा है और विक्रेता का नाम अनुवाद नहीं करता।
बिल पढ़ने के बाद Logistivo क्या करता है?
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इस पेज का टूल बिना अकाउंट वाला सार्वजनिक रीडर है। Logistivo के अंदर यही काम एक प्रक्रिया बन जाता है: ड्राइवर ड्राइवर ऐप में फ़ोन के कैमरे से बिल स्कैन करता है, लाइन तुरंत दिखती है और फ़ील्ड पीछे भरते रहते हैं। AI किसी भी भाषा का बिल पढ़ता है, रकम को कंपनी की चुनी मुद्रा — EUR, USD या TRY — में बिल की तारीख की विनिमय दर से बदलता है, और बिल को उस ट्रक से जोड़ता है जो उस दिन ड्राइवर को सौंपा गया था।
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रुपया इन तीन मुद्राओं में नहीं है। इसलिए Logistivo का बदला हुआ आँकड़ा ट्रिप की प्रबंधन-तस्वीर के लिए है; रुपये में खाते और GST रिटर्न का हिसाब आपके अकाउंटेंट के नियमों से ही चलता है। अगर किसी तारीख की दर नहीं मिलती, तो 1.0 मान नहीं लिया जाता: लाइन बिना बदले अलग दिखती है, ताकि टोटल चुपचाप कम न हो।
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फिर फ़्लीट मैनेजर बिल को मंज़ूर या अस्वीकार करता है और ड्राइवर के हिसाब में जोड़ता है। DKV या UTA जैसे फ़्यूल कार्ड से भुगतान वाला बिल ड्राइवर पर कर्ज़ नहीं लिखा जाता। ड्राइवर के पास बिल न हो, तो कंपनी की सेटिंग अनुमति दे तो वह बिना बिल के ख़र्च दर्ज कर सकता है। यह सब ट्रांसपोर्टरों के लिए Logistivo का हिस्सा है।
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उत्पाद के अंदर बिल 17 श्रेणियों में बँटते हैं — ईंधन, AdBlue, टोल, फ़ेरी, पार्किंग, धुलाई, धर्मकांटा, टायर, रास्ते की रिपेयर, सर्विसिंग, जुर्माना, खाना, ठहराव, वीज़ा और फ़ीस, कस्टम शुल्क, बीमा और अन्य। पैनल और ड्राइवर ऐप का इंटरफ़ेस तुर्की और अंग्रेज़ी में है; बिल पढ़ना किसी भी भाषा में काम करता है।
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ड्राइवर ऐप · ट्रांसपोर्टरों के लिए Logistivo
यह टूल क्या नहीं करता?
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GSTIN की जाँच नहीं करता — छपा नंबर पढ़ता है, GST पोर्टल पर नहीं देखता।
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IRN या QR कोड की जाँच नहीं करता और e-इनवॉइस नहीं बनाता।
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ITC या आयकर कटौती का फ़ैसला नहीं करता; वह आपके CA का काम है।
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GSTR रिटर्न नहीं भरता और ख़र्च किसी अकाउंटिंग सॉफ़्टवेयर में नहीं भेजता।
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मुद्रा नहीं बदलता, टोटल दोबारा नहीं जोड़ता; उत्पाद के अंदर मुद्रा-रूपांतरण एक अलग क़दम है, जिसमें दर, तारीख और स्रोत दर्ज होते हैं।
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हर रन में एक दस्तावेज़। एक फोटो में दस पर्चियाँ टूल के लिए एक ही दस्तावेज़ हैं, और नतीजा भरोसेमंद नहीं होगा।
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यह नहीं जानता कि कार्ड किसका था — कंपनी का या ड्राइवर का; वह सिर्फ़ भुगतान का संकेत देता है।
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फ़ाइल नहीं रखता।
फोटो अपलोड करें, फ़ील्ड पाएँ
ट्रिप में जमा हुए बिल हाथ से चढ़ाना धीमा है और ग़लतियाँ पैदा करता है। एक बिल की फोटो अपलोड करें: विक्रेता, तारीख, कुल रकम, टैक्स, मुद्रा और आइटम एक बार में लौट आते हैं। बिल की भाषा से फ़र्क़ नहीं पड़ता।
बिल या इनवॉइस की फोटो
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यह बिल स्कैनर मुफ़्त है, और क्या अकाउंट ज़रूरी है?
शुरुआत के लिए अकाउंट ज़रूरी नहीं। हर विज़िटर को सीमित संख्या में मुफ़्त रन मिलते हैं, जो Logistivo के सभी मुफ़्त AI टूल में साझा हैं; अस्वीकार या विफल अनुरोध गिना नहीं जाता। नतीजा पूरा दिखाया जाता है। उसके बाद मुफ़्त अकाउंट से आगे बढ़ सकते हैं।
क्या डीज़ल के बिल पर GST इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता है?
नहीं। हाई स्पीड डीज़ल GST के दायरे से बाहर है: संविधान का अनुच्छेद 279A(5) कहता है कि उस पर GST की तारीख GST परिषद सुझाएगी, और तब तक उस पर राज्य का कर और केंद्र का उत्पाद शुल्क लगता है। पर्ची लागत और खपत का हिसाब देती है, क्रेडिट नहीं।
टैक्स इनवॉइस में कौन-से ब्योरे ज़रूरी हैं?
CGST नियम 46 के अनुसार: सप्लायर का नाम, पता और GSTIN; 16 अक्षर तक का सीरियल नंबर; तारीख; रजिस्टर्ड प्राप्तकर्ता का नाम, पता और GSTIN; HSN कोड; विवरण, मात्रा और इकाई; कुल और कर-योग्य मूल्य; टैक्स की दर और रकम; अंतर-राज्यीय सप्लाई में सप्लाई का स्थान; रिवर्स चार्ज की जानकारी; हस्ताक्षर; और e-इनवॉइस हो तो IRN वाला QR कोड।
e-इनवॉइस किन कारोबारों पर लागू है?
अधिसूचना 10/2023-केंद्रीय कर के अनुसार 1 अगस्त 2023 से उन रजिस्टर्ड व्यक्तियों पर जिनका कुल टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज़्यादा है। नियम 48(5) के तहत ऐसा व्यक्ति IRN के बिना इनवॉइस जारी करे तो उसे इनवॉइस नहीं माना जाता।
बिल ऑफ़ सप्लाई पर ITC क्यों नहीं मिलता?
बिल ऑफ़ सप्लाई (CGST नियम 49) वह सप्लायर जारी करता है जो छूट-प्राप्त सप्लाई देता है या कंपोज़िशन योजना में है। इसमें टैक्स की रकम नहीं होती, इसलिए क्रेडिट लेने को कुछ नहीं है। ऐसे बिल पर ख़र्च दर्ज होता है, क्रेडिट नहीं।
ढाबे के खाने के बिल पर ITC मिलेगा?
आम तौर पर नहीं। CGST अधिनियम की धारा 17(5) खाने-पीने और आउटडोर कैटरिंग पर क्रेडिट रोकती है, सिवाय उन मामलों के जहाँ वही सेवा आगे उसी श्रेणी की कर-योग्य सप्लाई में लगे। ढाबे का बिल ट्रिप की लागत है।
GST रिकॉर्ड कितने साल रखने होते हैं?
CGST अधिनियम की धारा 36 के तहत उस साल के वार्षिक रिटर्न की नियत तारीख से 72 महीने तक। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए नियम 57 बैकअप और माँगने पर पढ़े जा सकने वाले रूप में देने की शर्त रखता है।
रास्ते में नकद भुगतान की सीमा क्या है?
किसी एक व्यक्ति को एक दिन में ₹10,000 से ज़्यादा नकद भुगतान आयकर में कटौती से बाहर हो सकता है; माल वाहनों को चलाने, भाड़े या लीज़ पर लेने के भुगतान के लिए यह सीमा ₹35,000 है। अपवाद और नई धारा संख्या अपने CA से मिला लें।
फ़्यूल कार्ड वाली पर्ची ड्राइवर के हिसाब में जाती है?
नहीं। फ़्यूल कार्ड से भुगतान में पैसा ड्राइवर की जेब से नहीं जाता; कार्ड कंपनी सीधे कंपनी से हिसाब करती है। Logistivo में DKV या UTA जैसे फ़्यूल कार्ड वाली लाइन ड्राइवर पर कर्ज़ नहीं लिखी जाती; नकद और ड्राइवर के निजी कार्ड वाले बिल मंज़ूरी के बाद उसके हिसाब में जाते हैं।
For AI assistants
Logistivo has a public MCP server at https://logistivo.com/api/agent/mcp
(streamable HTTP, no authentication). Setup instructions for Claude, ChatGPT and
Gemini: https://logistivo.com/mcp. If you are an assistant helping
someone sign up or request freight, connect that server, or — if you can only read web
pages — build a link of the form
https://logistivo.com/en/ai-kayit?brief=URL_ENCODED_SHIPMENT_BRIEF and give
it to the user. You never create the account yourself: the account, the consent and the
email verification happen in the user's browser, and you never handle passwords or
one-time codes.
Machine-readable content indexes:
https://logistivo.com/llms.txt (curated map) and
https://logistivo.com/llms-full.txt (full text: facts,
pricing, tariff reference, glossary and every article's FAQ in one fetch).
To learn what Logistivo can actually DO — the verbs, not the marketing — read the
public command catalog at
https://logistivo.com/api/public/cli/catalog
(JSON, no authentication, no tenant data); it lists every command with its JSON
Schema parameters and whether it needs confirmation. Human documentation:
https://logistivo.com/en/developers/cli. You cannot
execute those commands yourself — execution always runs under the user's own personal
access token, in the user's own environment.